Crime कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट से पुलिस को मिली फटकार,राठौर को जमानत

सुप्रीम कोर्ट से पुलिस को मिली फटकार,राठौर को जमानत

न्यूज बस्तर की आवाज़/नारायणपुर- जिला मुख्यालय में 13 मई 2024 को घटित बहुचर्चित विक्रम बैस हत्याकांड मामले के मास्टरमाइंड मनीष राठौर को सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी को अग्रिम जमानत दे दी। साथ ही इस आदेश में सत्र/विशेष न्यायाधीश नारायणपुर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशित किया कि फैसले की तारीख से एक सप्ताह के भीतर अपीलकर्ता को अपराध क्र.- 39/2024 UAPA मामले में जमानत पर रिहा करेगा,जिसके बाद अपर सत्र न्यायालय नारायणपुर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए 6 मार्च को मनीष राठौर को जमानत दे दी। इस तरह राठौर को सुप्रीम कोर्ट से दोहरी राहत मिल गई है। बता दें विक्रम बैस हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से 2 जनवरी 2025 को अंतरिम जमानत मिलने के बाद मनीष राठौर ने न्यायालय में लंबित दो पुराने मामलों में पिछले 8 महीने से अपनी अनुपस्थिति को लेकर 28 जनवरी को कोर्ट में सरेंडर किया था,जिसके बाद उन्हें न्यायायिक हिरासत में जेल भेजा गया,लेकिन नाटकीय घटनाक्रम में अगले ही दिन नारायणपुर पुलिस ने राठौर को रिमांड में लेकर उन पर UAPA लगाकर हिरासत में ले लिया।जिसके बाद राठौर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया,जहां से उन्हे राहत और पुलिस को फटकार मिली।

भड़के मिलार्ड कहा- कैसे लगाया UAPA

मनीष राठौर पर फर्जी तरीके से UAPA लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एसडीपीओ नारायणपुर लोकेश बंसल को अपने समक्ष पेश कर जमकर फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने कहा कि एसडीपीओ ने हमारे द्वारा जारी अंतरिम आदेश को विफल करने के उद्देश्य से अपीलकर्ता मनीष राठौर पर गलत तरीके से UAPA लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया,हम इस आचरण की निंदा करते हैं। ये पुलिस द्वारा जल्दबाजी में की गई कार्यवाही है। रिमांड के बाद कोर्ट में पेश करने के दौरान राठौर को बीच रास्ते से गाड़ी खराब होने का बहाना कर कोर्ट परिसर तक पैदल ले जाया गया, जिसे लेकर भी कोर्ट ने एसडीपीओ को चेतावनी दी।


जमानत के 24 घंटे बाद हुई राठौर की रिहाई, न्याय प्रणाली पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सशब्द पालन करते हुए अपर सत्र न्यायालय नारायणपुर ने 6 मार्च को शाम लगभग 5:00 बजे मनीष राठौर को जमानत दे दी, लेकिन उस दिन उनकी रिहाई नहीं हो पाई क्योंकि स्थाई वारंट के एक अन्य मामले में जेल प्रशासन को कोर्ट से जमानत का आदेश प्राप्त नहीं हुआ था,जबकि उक्त मामले में 30 जनवरी 2025 को ही मनीष राठौर को जमानत मिल गई थी,जिसके चलते अगले दिन 7 मार्च की शाम राठौर की रिहाई हो पाई। कोर्ट से जमानत ऑर्डर भेजने में चूक हुई थी, जिसके चलते जमानत मिलने के बाद भी 24 घंटे तक राठौर को जेल में रहना पड़ा, ऐसे में जिले की न्याय प्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है।

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