शिक्षा विभाग के अधिकारी के विरुद्ध मानसिक प्रताड़ना एवं नौकरी से निकाल देने की धमकी की शिकायत लेकर जिले के महिला कर्मचारियों ने जिले की पहली महिला कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार
परियना दिव्यांग आवासीय विद्यालय, गरांजी नारायणपुर में कार्यरत महिला कर्मचारियों ने अधीक्षक के खिलाफ लगाए कई गंभीर आरोप
अधीक्षक के द्वारा हम लोगों से कहा जाता है कि तुम लोग मेरी शिकायत लेकर कलेक्टर या डिओ के पास जाओ मेरा कोई कुछ नही उखाड़ सकता।
जिले में पहली बार दो महिला अधिकारी पदस्थ होने के बाद महिला कर्मचारियों ने हिम्मत जुटाकर किया महिला कलेक्टर से शिकायत
न्यूज बस्तर की आवाज़ /दिनांक 03/03/2025 नारायणपुर में जिला कलेक्टर कार्यालय में जनदर्शन कार्यक्रम में परियना दिव्यांग आवासीय विद्यालय, गरांजी नारायणपुर में कार्यरत समस्त कर्मचारी आवासीय विद्यालय के अधीक्षक उमेश रावत के विरुद्ध कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत करते लगाए कई गंभीर आरोप
हम समस्त कर्मचारियों को हमेशा गाली-गलौज एवं नौकरी से निकालने की धमकी लगातार दी जाती है। हमारे से अधीक्षक के द्वारा अपने निज निवास में घरेलू कार्य कराया जाता है। यहाँ तक कि उनके घर में पोछा लगाना, बर्तन मौजना, कपड़े धुलवाना, अपने घर के रेत गिट्टी को उठवाना एवं समय-समय पर विशेष त्यौहारों में अपने घर के समस्त कपड़ों को विद्यालय में लाकर हम लोगों से धुलवाया जाता है।
लगातार दो माह से हम सभी कर्मचारियों के ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि तुम लोगों का वेतन पहले 8000.00 रूपए था उसे अब 10500. 00 रूपए करवा दिया हूँ उसके बदले मुझे नगद सभी लोग दो-दो हजार रूपए देना। नही देने पर नौकरी छोड़ कर चल देना।*
हम स्टॉफ के 7 लोग संस्था प्रमुख से छुट्टी लेकर विगत 9 फरवरी 2025 दिन रविवार को घूमने चित्रकूट एवं हांदावाड़ा गए थे, आने में थोड़ा विलंब होने के कारण हम सभी कर्मचारियों को रात में छात्रावास में प्रवेश करने नही दिया गया। हम लोग सभी जिसमें 5 लड़कियाँ हैं, रात के समय हम कहाँ जाते. रात को 01 बजे हम जगह खोजते खोजते किचन में आश्रय लिए।*
हमें कहा गया कि तुम लोग आज रात भर कहीं भी रहो मुझे इससे कोई मतलब नही है। अधीक्षक द्वारा नशे का सेवन कर गाली दिया गया जिसमें बे, साले, #### के तुम लोग नमक हराम हो तुम लोगों को नमक नही लगता, निकल जाओ हॉस्टल से, सुबह बात करेगें। हम लोग रात भर बाहर थे।
दिव्यांग स्टॉफ भूपेन्द्र पांडे से अपने घर की गाड़ी चार चक्का, दो चक्का को हॉस्टल में लाकर साफ सफाई कराया जाता है, एवं कई बार गाली गलौज करते हुए मारने के लिए हाथ भी उठाया जाता है।*
हम समस्त स्टॉफ के द्वारा कभी भी बहुत जरूरी घरेलू कार्य होने पर छुट्टी माँगने पर गाली-गलौज करने के बाद ही छुट्टी दिया जाता है। संस्था में कोई भी उच्च अधिकारी आने पर हम लोगों को बात करने नहीं दिया जाता है, जिससे हम अपनी व्यथा उच्च अधिकारियों को बताने में असमर्थ हो जाते हैं।
हम सभी से बार-बार यह कहा जाता है कि तुम लोगों को आठ-नौ महीने से मैं पाल रहा हॅू। मै तुम लोगों को खिलाता पिलाता हूँ, मैं तन्ख्वाह देता हूँ।*
हम समस्त स्टॉफ में से कोई कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की किसी भी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं किए हैं फिर भी हम लोगों से बच्चों को स्पीच थेरेपी, फिजीयोथेरेपी कराया जाता है। हम समस्त कर्मचारी पूरे 24 घण्टे की ड्यूटी छात्रावास में ही रहकर करते हैं। हम शाम को बच्चों को कोचिंग देते हैं व किसी बच्चे का स्वास्थ्य खराब होने से उसके देखरेख करने के लिए हॉस्पिटल में भी रहते हैं। संस्था में एक कर्मचारी शिक्षक ज्योति पटेल जो कि दो माह में केवल दो से चार दिन की ड्यूटी करती है, और आकर उपस्थिति पंजी में अधीक्षक की सहमति से हस्ताक्षर कर वेतन आहरण करती है। इस तरह का पक्षपात कर हम लोगों को मानसिक एवं शारीरिक रूप से नियमित परेशान किया जा रहा है। अधीक्षक द्वारा हम लोगों को माध्यम बनाकर बच्चों को कहलवाया जाता है कि बच्चे आप अपने घर से तेल, साबुन, कॉपी, किताब, पेन इत्यादि लेकर आएँ एवं प्रत्येक पाँच बच्चों के पीछे 50 ग्राम तेल, एक-एक साबुन नहाने एवं कपड़ा धोने का दिया जाता है। पूर्व छात्रावास के लिए चॉवल किराने के दुकान से आता था परन्तु चार-पाँच माह से यह सोसायटी के चावल का उपयोग किया जा रहा है।
परियना दिव्यांग आवासीय विद्यालय, गरांजी नारायणपुर में कार्यरत समस्त कर्मचारी आवासीय विद्यालय के अधीक्षक उमेश रावत के प्रताड़ना से प्रताड़ित कई वर्षों एवं महीने से हो रहे थे जिले में विगत कुछ माह पूर्व तक जिला प्रशासन में पुरुष अधिकारी होने के चलते कोई भी महिला कर्मचारी किसी भी पुरुष अधिकारी के खिलाफ शिकायत होने पर भी या तो जांच प्रक्रिया को दबा दिया जाता था या तो शिकायतकर्ता को शिकायत वापस लेने को मजबूर कर दिया जाता था विगत 2 माह पूर्व जब जिला में पहली महिला कलेक्टर ने पदभार संभाला उसके बाद से महिला कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं की अलग अलग रूप देखकर कर्मचारियों ने हिम्मत जुटाकर अधीक्षक के विरुद्ध शिकायत की अब देखना है कि शिकायत के बाद इस पर क्या कार्यवाही होती है या जांच टीम गठित कर मामला को दबा दिया जाता है ?