
न्यूज़ बस्तर की आवाज़ @ नारायणपुर। आज वनविभाग द्वारा नारायणपुर वनमण्डल अंतर्गत स्थानीय प्रतिष्टित व्यापारी एवं वरिष्ठ बीजेपी नेता के बखरूपारा में स्थित फर्नीचर मार्ट में पर बड़ी मात्रा में रखा अवैध सागौन जप्त किया है।यहां बड़ी संख्या में तैयार फर्नीचर और स्लीपर आदि जप्त किए गए है।वनविभाग के अधिकारियों ने बताया कि जप्त की गई लकड़ी की कीमत 50 लाख रुपए से भी ज्यादा है।
लकड़ी नारायणपुर के प्रतिष्ठित व्यपारी राजू उर्फ गौतम गोलछा के गोदाम और अन्य कार्यस्थलों से जप्त की गई है।गौतम गोलछा भाजपा के पदाधिकारी होने के साथ पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता केदार कश्यप के बेहद करीबी माने जाते है।वनविभाग द्वारा की गई इस अप्रत्याशित कार्रवाई से नारायणपुर में हड़कंप मचा हुआ है।
नारायणपुर में धड़ल्ले से चल रहा है वन विभाग के साठगांठ से अवैध सागौन का कारोबार, कौन कौन है इंसमे शामिल ?
नारायणपुर में पिछले कुछ दिनो या कहे आचार संहिता के लगने के बाद से लगातार वन विभाग द्वारा ताबड़तोड़। कार्यवाही करते हुए अवैध सागौन एवं अन्य चिरान जब्त कर कार्यवाही किया जा रहा है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों की माने तो इंसमे भी वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है, जहाँ जहाँ से वन विभाग के अधिकारियों और कुछ मैदानी कर्मचारियों को हफ्ता नही पहुँच रहा था ऐसे लोगो को टारगेट कर आचार संहिता का पूरा लाभ उठाते हुए अपना डर दिखाते हुए कार्यवाही भी किया जा रहा है। क्योंकि आचार संहिता के दौरान न किसी अधिकारी का दबाव होता है ना कोई मंत्री या विधायक की बात सुनते है अधिकारी, सिर्फ अपनी मन की करते है, पिछले 5 सालों में जितना वन विभाग द्वारा कार्यवाही नही किया गया उससे कई गुना कार्यवाही सिर्फ आचार संहिता लगने के बाद ही क्यो हुआ, क्या इससे पहले विभाग सो रही थी क्या ?
जब इतनी अधिक मात्रा में जंगल से लकड़ी काटकर चिरान बनाकर दलालों के पास तक पहुँच जाना और वन विभाग के कर्मचारियों को भनक न लगना और नाक के नीचे से सारा लकड़ी नारायणपुर शहर आ जाना कोई इतेफाक तो नही हो सकता, ज़िससे वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी के जिम्मेदारी पर सवाल तो खड़ा होना है ? इंसमे तो विभाग की पूरी मिलीभगत से ही इस काम को अंजाम दिया जाता है , आज तक कभी वन विभाग के अधिकारी जंगल मे लकड़ी काटने के दौरान या जब दिन दहाड़े या रातों रात में अवैध चिरानो का दलालों को सप्लायर किया जाता उस वक्त क्यो कोई कार्यवाही नही कर पाई, हमेशा से जो भी कार्यवाही चिरान बनने के बाद या फर्नीचर बनाने वालों के पास ही क्यो होती है ?