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बस्तर पंडुम 2025 लोकनृत्य संस्कृति परंपरा खान पान और वेशभूषा के माध्यम से संस्कृति को संरक्षण किया जाएगा – वनमंत्री श्री केदार कश्यप जनजातीय नृत्य में नेतानार के कचरा वड्डे एवं साथियों ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया

बस्तर पंडुम 2025

लोकनृत्य संस्कृति परंपरा खान पान और वेशभूषा के माध्यम से संस्कृति को संरक्षण किया जाएगा – वनमंत्री श्री केदार कश्यप

जनजातीय नृत्य में नेतानार के कचरा वड्डे एवं साथियों ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया

नारायणपुर, 22 मार्च 2025  जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग की अद्भुत कला और संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करने के उद्देश्य से इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है, जो प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा। बस्तर पंडुम जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास, संसदीय कार्य एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप शामिल हुए।

उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर प्राकृतिक रूप से समृद्ध है, जिसे देखने के लिए देश विदेश पर्यटक प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में आते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति को बचाए रखने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, लोककला, शिल्प, तीज-त्यौहार, खानपान, बोली-भाषा, रीति-रिवाज, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत, नाट्य, व्यंजन और पेय पदार्थों के मूल स्वरूप को संरक्षित करना और कला समूहों के सतत विकास को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार वनवासी क्षेत्र में रहने वाले हमारे आदिवासी भाई एवं बहनों की संस्कृति एवं जल जंगल जमीन को बचाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि वनांचल में रहने वाले लोग प्रकृति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विश्व वानिकी दिवस गत 21 मार्च को आयोजित हुआ, जिसका उल्लेख करते हुए कहा आदिवासी परंपरा को जिवित रखने के लिए कई अवसरों पर पत्ते से भोजन करते हैं। जंगल के लघुवनोपज आम, आंवला, महुआ, टोरा, चिरोंजी, तेंदु, बेहड़ा, चार, गोंद इत्यादि से निर्भर रहते हैं, ये जनजातियों का संस्कृति माना जाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा। बस्तर के लोग देवी देवताओं, आराध्य देवी की भक्ति करने वाले लोग हैं। हम सब सौभाग्य हैं कि देश दुनिया के लोग बस्तर की संस्कृति को अवलोकन करने आते है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के एतिहासिक धरोहर कुटुमसर की गुफा, चित्रकोट जलप्रपात, हांदावाड़ा कांगेरवेली जैसे स्थानों का जिक्र करते हुए बस्तर की सुदरता को बनाए रखने कहा। उन्होंने गढ़बेंगाल में जन्में टायगर बॉय चेंदरू मण्डावी के द्वारा किये गये कार्यों का उल्लेख किया।

कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम ने संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज के संस्कृति, वेशभूषा, रहन सहन, खान पान, बोली भाषा आदि को बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के इस कदम को ऐतिहासिक बताया है। देवताओं की पूजा पद्धति, विभिन्न जातियों की संस्कृति संबंधी जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले पीढ़ी को संस्कृति, लोक नृत्य, वेशभूषा, जात्रा सहित बस्तर की संस्कृति को बचाए रखने के लिए अपील किया।

नगरपालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रसाद बघेल ने बस्तर पंडुम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम आयोजन से जनजातियों का संस्कृति को बचाए रखने के लिए सरकार की यह पहल सराहनीय है। छोटेडोंगर सरपंच श्रीमती संध्या पवार ने हल्बी बोली में संबोधित करते कहा कि जल जंगल जमीन को बचाने वाले वनांचल में रहने वाले लोग ही हैं। राज्य सरकार के द्वारा बस्तर पंडुम के माध्यम से आदिवासियों की जीवन पर्यंत किये जाने वाले कार्य ही संस्कृति के रूप में जाना जाता है, उसे संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम एक माध्यम के रूप में यह उत्सव प्रतिवर्ष मनाया जाएगा। सरकार की यह कदम अस्मरणीय रहेगा। सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक रूपसाय सलाम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग में जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग की अद्भुत कला और संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करने के उद्देश्य से इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है, जो एक बस्तर के लिए ऐतिहासिक महत्व का आयोजन है। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग के लिए बस्तर पंडुम का आयोजन संस्कृति एवं परंपरा को बचाए रखने के लिए बेहतरीन कार्यक्रम साबित होगा। जिला स्तरीय बस्तर पंडुम कार्यक्रम का आयोजन ग्राम माहाका के इंडोर स्टेडियम में किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय नृत्य, जनजातीय गीत, जनजातीय नाट्य, जनजातीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण का प्रदर्शन, जनजातीय शिल्प एवं चित्रकला का प्रदर्शन, जनजातीय पेय पदार्थ एवं व्यंजन को बचाए रखने हेतु प्रदर्शन प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया।

जनजातीय नृत्य में नेतानार के कचरा वड्डे एवं साथियों ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। जनजातीय नाटक में कौशल कोर्राम एवं साथी, गीत में बोरावण्ड के हेमलता एवं साथी, वाद्ययंत्र में कोडोली के राजूराम एवं साथी, वेशभूषा एवं आभूषण में दिनेश सलाम एवं साथी, शिल्प एवं चित्रकला में बलदेव मण्डावी एवं साथी, पेय पदार्थ एवं व्यंजन में राधिका प्रतिमा एवं साथियों को पुरस्कार प्रदाय किया गया।

कार्यक्रम में पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी, राज्य अलंकरण दाउ मंदराजी पुरस्कार से सम्मानित पंडीराम मण्डावी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री प्रताप मण्डावी, जनपद पंचायत नारायणपुर के अध्यक्ष श्रीमती पिंकी उसेण्डी, ओरछा नरेश कोर्राम, नगरपालिका उपाध्यक्ष जय प्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्री चैतुराम कुमेटी और श्री मंगड़ूराम नूरेटी, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, सीईओ जिला पंचायत आकांक्षा शिक्षा खलखो, डीएफओ ससिगानंदन के, अपर कलेक्टर बीरेन्द्र बहाुद पंचभाई, जिला पंचायत सदस्य, पार्षदगण, जनपद पंचायत सदस्य, जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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